गोला में धड़ल्ले से जारी अवैध बालू तस्करी, कार्रवाई के निर्देशों के बावजूद नहीं थम रहा कारोबार

  • दामोदर नदी से ट्रैक्टर, टर्बो और हाइवा के जरिए हो रहा परिवहन, प्रशासनिक कार्रवाई पर उठ रहे सवाल

रामगढ : गोला थाना क्षेत्र में अवैध कारोबार कोई नई बात नहीं है। क्षेत्र में लंबे समय से अवैध बालू कारोबार फलता-फूलता रहा है और इसका खुलासा प्रायः तभी होता है, जब किसी अधिकारी या विभाग द्वारा छापेमारी कर मामले का भंडाफोड़ किया जाता है। अन्य दिनों में यह कारोबार निर्बाध रूप से संचालित होने की चर्चा आम लोगों के बीच होती रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गोला और सीमावर्ती बरलंगा थाना क्षेत्र अवैध बालू परिवहन का प्रमुख मार्ग बन चुका है। दामोदर नदी से ट्रैक्टर, टर्बो और हाइवा में बालू लोड कर हेसापोड़ा, कोराम्बे, भूभई, बंदा, रकुवा, सुतरी, रजरप्पा रोड, डीवीसी चौक और मुरी रोड होते हुए रांची एवं जमशेदपुर तक पहुंचाया जा रहा है।

रूट आसान होने के बाद बढ़ी गतिविधियां
जानकारों के अनुसार, गोला होकर जमशेदपुर जाने वाला अपेक्षाकृत सुगम और बिना टोल टैक्स वाला मार्ग बनने के बाद क्षेत्र में अवैध गतिविधियों में वृद्धि हुई है। बालू तस्करी से जुड़े लोगों ने भी अपने तौर-तरीके बदल लिए हैं। अब दिन के उजाले में भी ट्रैक्टरों से बालू ढुलाई देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि कई बार अवैध बालू लदे वाहन थाना और प्रखंड मुख्यालय के आसपास के मार्गों से भी गुजरते हैं। वहीं तस्करी का सबसे सक्रिय समय रात दो बजे से सुबह छह बजे तक माना जाता है, जब बड़ी संख्या में वाहन विभिन्न मार्गों से गुजरते हैं।
दो ट्रेक्टर के पकड़ने के बाद भी जारी है तस्करी
विगत 29 मई को जिला समाहरणालय में डीसी और एसपी की उपस्थिति में खनन टास्क फोर्स की बैठक की गई थी। बैठक में खनन विभाग, अंचल अधिकारियों और थाना प्रभारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित छापेमारी अभियान चलाने का निर्देश दिया गया था। साथ ही निर्देशों की अवहेलना पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी।जिसके बाद खनन विभाग ने छापामारी कर बुधवार को बालू लदा दो ट्रेक्टर को जब्त किया था।इसके बावजूद गोला क्षेत्र में रात के अंधेरे में अवैध बालू और कोयला तस्करी की गतिविधियां जारी है। इससे प्रशासनिक निगरानी और प्रभावी कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
खाली ट्रैक्टरों की रफ्तार बनी चिंता का कारण
ग्रामीणों का कहना है कि बालू खाली करने के बाद लौटने वाले ट्रैक्टरों की रफ्तार काफी तेज होती है। कई बार स्थिति ऐसी बन जाती है कि सड़क पर चलने वाले राहगीरों और अन्य वाहन चालकों को सुरक्षा के लिए सड़क किनारे हटना पड़ता है।
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